आर्मेनियाई यहूदी इज़राइली मान्यता को संबंधों का द्वार मानते हैं

1915 के आर्मेनियाई जनसंहार को मान्यता देने वाले इज़राइल के जून-अंत के कैबिनेट मतदान के बाद आर्मेनिया में यहूदी जीवन को नई दृश्यता मिल रही है। येरेवान में 3 जुलाई के शब्बात रात्रिभोज में 13 मुख्यतः रूसी-भाषी यहूदियों और तीन अरब मुस्लिम अतिथियों ने येरेवान ज्यूइश होम के माध्यम से शब्बात का स्वागत किया; यह नेटवर्क यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद आर्मेनिया में 2,000 तक यहूदियों के आने पर बना। समुदाय की हस्तियों ने कहा कि मान्यता इज़राइल-आर्मेनिया संबंधों को गर्म करने में मदद कर सकती है, यद्यपि तुर्किये और अज़रबैजान ने मतदान की निंदा की तथा बाकू के अश्केनाज़ी मुख्य रब्बी ने इज़राइल से इसे वापस लेने का आग्रह किया। इज़राइल के लिए कहानी ईरान और तुर्किये के पास रणनीतिक रूप से स्थित समुदाय में यहूदी निरंतरता, ऐतिहासिक सत्य और क्षेत्रीय कूटनीति को जोड़ती है।