सोलबर्ग ने पार्टियों को वास्तविक समय का मतदाता चेक-इन डेटा देने पर रोक लगाई

केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष न्यायाधीश नोआम सोलबर्ग ने निर्णय दिया कि मतदान-केंद्र समिति के सदस्य और पार्टी पर्यवेक्षक वास्तविक समय में यह रिपोर्ट नहीं कर सकते कि कौन-से मतदाता आए और मतदान किया। उन्होंने पाया कि किसी व्यक्ति की भागीदारी, मतदान का समय और मतदान-केंद्र का प्रकार निजी जानकारी हैं तथा चुनाव कानून पार्टी प्रतिनिधियों को अभियान के उपयोग के लिए ये विवरण भेजने का अधिकार नहीं देता। लिकुड, शास, यूनाइटेड टोरा जूडाइज़्म और धार्मिक ज़ायनवाद ने इस प्रथा को वैध बताया; सोलबर्ग ने उनका पक्ष खारिज किया। उन्होंने कहा कि न आने वाले मतदाताओं की पहचान कर उन्हें जुटाने के लिए चेक-इन डेटा का उपयोग उस उद्देश्य का उल्लंघन करता है जिसके लिए प्रतिनिधि इसे देखते हैं और इसलिए निजता कानून तोड़ता है।