ईरान के प्रवक्ता ने युद्धकालीन दमन पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ की आलोचना खारिज की
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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने 29 अक्टूबर की देर शाम प्रकाशित एक बयान में तेहरान के युद्धकालीन दमन को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ईरान मानवाधिकार निगरानी व्यवस्था की आलोचना खारिज कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था अमेरिका और इज़राइल की उन कार्रवाइयों की जिम्मेदारी ईरान पर डाल रही है, जिन्हें उन्होंने अपराध बताया। बकाई ने निगरानी के इस अधिदेश को राजनीति से प्रेरित बताया और आरोप लगाया कि ब्रिटेन ने इसे मानवाधिकार परिषद पर थोपा था। उन्होंने इस व्यवस्था पर सैन्य आक्रामकता और एकतरफा दबावकारी उपायों पर पर्दा डालने का आरोप लगाया। बकाई ने कहा, “ऐसा दृष्टिकोण गहराई से भ्रामक और अत्यधिक छलपूर्ण है।” उनके मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को यह बयान फ़ारसी में फिर प्रकाशित किया। यह प्रतिक्रिया 28 अक्टूबर को महासभा की तीसरी समिति के सत्र के बाद आई। उस सत्र में ईरान पर विशेष प्रतिवेदक माई सातो ने बताया था कि ईरानी लोग सैन्य हमलों के साथ-साथ अपने ही अधिकारियों की ओर से गिरफ्तारी, यातना, जबरन गायब किए जाने और फांसी का सामना कर रहे हैं। सातो ने कहा कि अधिकारियों ने दमन को उचित ठहराने के लिए युद्ध और प्रतिबंधों का सहारा लिया और प्रदर्शनकारियों को शत्रु विदेशी शक्तियों के एजेंट के रूप में पेश किया। उन्होंने जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित कम से कम 34 फांसियों की जानकारी दी और कहा कि संचार पर पाबंदियों ने सैन्य हमलों की चेतावनियां पहुंचाने में बाधा डाली और आजीविका को नुकसान पहुंचाया। उसी सत्र में इज़राइल के प्रतिनिधि ने तेहरान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने और अपने लोगों के कल्याण से ऊपर सैन्य परमाणु विकास को रखने का आरोप लगाया। फ़्रांस ने ईरान से निगरानी के अधिदेशों के तहत सहयोग करने का आग्रह किया, जबकि कनाडा ने मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और साक्ष्यों का संरक्षण जारी रखने की मांग की। ईरान के प्रतिनिधि ने इन व्यवस्थाओं को समाप्त करने की मांग की; रूस ने उन पर पश्चिमी राजनीतिक हितों की सेवा करने का आरोप लगाया। सातो ने शत्रुता समाप्त करने के लिए कूटनीति अपनाने और घरेलू दमन समाप्त करने का आह्वान किया।
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