ज़मीर ने हरेदी येशिवा छात्रों से कहा, सैन्य सेवा में उनकी धार्मिक पहचान सुरक्षित रहनी चाहिए
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इज़राइल रक्षा बल के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने मंगलवार को गान यावने में हरेदी येशिवा छात्रों से कहा कि सैन्य सेवा का दायरा बढ़ाने के साथ उनकी धार्मिक पहचान की रक्षा भी होनी चाहिए। उन्होंने एक हरेदी हेस्देर येशिवा में छात्रों से मुलाकात की। इसमें नेत्साह येहूदा संघ के मुख्य कार्यकारी योसी लेवी, देरेख हाइम येशिवाओं के प्रमुख रब्बी कार्मी ग्रॉस और अन्य कमांडर उपस्थित थे। ज़मीर ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आप हरेदी बनकर सेना में आएँ और हरेदी बनकर ही निकलें।” उन्होंने इस पहचान की रक्षा को सेना की प्रतिबद्धता और अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता, दोनों बताया। उन्होंने कहा कि कमांडरों को हरेदी सैनिकों की आस्था और जीवनशैली समझनी चाहिए तथा संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता के साथ उनका नेतृत्व करने के लिए आवश्यक तैयारी मिलनी चाहिए। ज़मीर ने तोराह अध्ययन, जीवन की तैयारी और इज़राइल की सुरक्षा में योगदान के मेल की प्रशंसा की और इन्हें परस्पर पूरक दायित्व बताया। उन्होंने पिरके अवोत का उल्लेख किया और तोराह अध्ययन के स्थल पर आने के अवसर को सौभाग्य बताया। सेना के विकास की अपनी बहुवर्षीय होशेन योजना पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके 12 मुख्य विषय इज़राइल के बारह कबीलों के अनुरूप हैं। उन्होंने महायाजक के वक्षपट के अलग-अलग रत्नों का उदाहरण देकर समझाया कि एक साझा संपूर्णता के भीतर अलग पहचान कैसे सुरक्षित रह सकती है। उन्होंने सैन्य सेवा के आधार को व्यापक बनाने की आवश्यकता को 7 अक्टूबर के हमले से मिले सबक से जोड़ा। उनके आकलन में, इन सबकों के अनुसार सेना को अधिक बड़ा, मजबूत और बेहतर तैयार होना चाहिए। उनकी टिप्पणियों में सैन्य बल बढ़ाने के इस लक्ष्य के साथ हरेदी रंगरूटों की धार्मिक आवश्यकताओं का सम्मान करने की प्रतिबद्धता भी जुड़ी थी।


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