तुर्की की संसद ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मक्का रक्षा समझौते को मंजूरी दी
तुर्की की संसद ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के अनुसमर्थन को अधिकृत करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। ग्रैंड नेशनल असेंबली ने समझौते के अलग-अलग अनुच्छेदों पर बहस के बाद मतदान पूरा होने की जानकारी दी। इससे तीन देशों की यह व्यवस्था तुर्की की संसदीय स्वीकृति प्रक्रिया में आगे बढ़ी। बहस के दौरान सत्तारूढ़ दल के सांसद ज़िया अल्तुन्यालदिज़ ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना और संघर्ष को रोकना है। उन्होंने कहा कि यह “किसी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाता।” उन्होंने समझौते को क्षेत्रीय लड़ाई का विस्तार करने के साधन के बजाय निवारण का माध्यम बताया। विपक्षी सांसदों ने सवाल उठाए कि यह व्यवस्था कैसे काम करेगी। मेहमत गुज़ेलमंसुर ने कार्यान्वयन के ऐसे स्पष्ट नियमों की मांग की जिनसे तुर्की की अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ टकराव से बचा जा सके। उन्होंने तुर्की की ओर से काम करने वाली या सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करने वाली व्यवस्थाओं पर संसदीय निगरानी की भी मांग की। बूरा कावुंजु ने समझौते की विषयवस्तु और इसे प्रस्तुत करने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल से खतरे के उल्लेख को राजनीतिक प्रचार का साधन नहीं बनना चाहिए। राष्ट्रपति रेजेप तैयप एर्दोआन, सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने 7 अगस्त को मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने हस्ताक्षर के समय जारी बयान में कहा था कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। बयान में समझौते को सामूहिक निवारण मजबूत करने और सभी क्षेत्रों में रक्षा सहयोग बढ़ाने का आधार भी बताया गया था।

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