तंजानिया की अदालत ने टुंडु लिसु को राजद्रोह से बरी किया, उकसावे के लिए चार साल की सजा सुनाई
तंजानिया के उच्च न्यायालय ने 6 नवंबर को विपक्षी नेता टुंडु लिसु को राजद्रोह के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन उकसावे का दोषी पाते हुए चार साल की जेल की सजा सुनाई। दार एस सलाम में न्यायाधीश डनस्टन न्दुंगुरु की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला दिया। लिसु विपक्षी दल चाडेमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। न्यायाधीशों ने पाया कि अभियोजन पक्ष सरकार को डराने की मंशा साबित नहीं कर पाया, जो राजद्रोह के आरोप का एक अनिवार्य तत्व है। हालांकि, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि 2025 के आम चुनाव को रोकने या बाधित करने की लिसु की सार्वजनिक अपीलें उकसावे की श्रेणी में आती हैं। न्दुंगुरु ने कहा कि दंड प्रक्रिया अधिनियम की धारा 319 अदालत को कम गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराने की अनुमति देती है, भले ही उस अपराध का अलग से आरोप न लगाया गया हो। उन्होंने दंड संहिता की धारा 390 के तहत उकसावे को ऐसा अपराध बताया। लिसु ने फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन पर राजद्रोह का आरोप था, उकसावे का नहीं। उन्होंने अदालत से कहा, “आपने ऐसा अपराध बना दिया जो मौजूद ही नहीं था।” उन्होंने अभियोजन को राजनीति से प्रेरित बताया है। अदालत ने उनके चुनावी नारे, “सुधार नहीं, तो चुनाव नहीं”, को उकसावे की दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त माना। 58 वर्षीय लिसु चुनावी और संवैधानिक सुधारों के लिए अभियान चलाने के बाद अप्रैल 2025 से हिरासत में हैं। राजद्रोह के लिए मृत्युदंड दिया जा सकता है। उन्हें तंजानिया की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, अपील न्यायालय, में अपील करने की अनुमति मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जमानत मांगना चाहते हैं, क्योंकि राजद्रोह के विपरीत उकसावे के मामले में इसकी अनुमति है; जमानत मंजूर होने या रिहाई की पुष्टि नहीं हुई है।

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