ईरानी न्यायपालिका ने करज में जनवरी के प्रदर्शनों से जुड़े मामले में तीन को फाँसी देने की बात कही
ईरान की न्यायपालिका ने कहा कि हसन दिवबंद, हामिद काज़ेमी और रज़ा ज़ंगनेह को 8 नवंबर की सुबह फाँसी दी गई। मामला करज में 8 और 9 जनवरी को हुए प्रदर्शनों से जुड़ा था। घोषणा के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने तीनों पुरुषों की मौत की सज़ा बरकरार रखी थी। न्यायपालिका ने कहा कि सजाएँ “आज सुबह लागू कर दी गईं।” उसके अनुसार करज की क्रांतिकारी अदालत ने पुरुषों को मौत की सज़ा सुनाई थी और उनकी सारी संपत्ति ज़ब्त करने का आदेश दिया था। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वे सशस्त्र हमलों में शामिल हुए, सार्वजनिक और सरकारी परिसरों को नुकसान पहुँचाया तथा बिजली के बुनियादी ढाँचे को नष्ट किया, जिससे आपूर्ति बाधित हुई। ये आरोप मामले के बारे में अधिकारियों का पक्ष हैं। घोषणा के अनुसार, अल्बोर्ज़ प्रांत में खुफिया मंत्रालय के कार्यालय की रिपोर्ट के बाद दिवबंद को 11 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में दस अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। न्यायपालिका ने कहा कि बाकी अभियुक्तों को पाँच से 10 वर्ष की जेल की सज़ा मिली और सभी अभियुक्त गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में रहे थे। उसने कहा कि संपत्ति ज़ब्त करने की कार्रवाई जारी थी। 10 सितंबर को प्रकाशित एक अलग जाँच में ह्यूमन राइट्स वॉच और अब्दुर्रहमान बोरूमंद केंद्र ने कहा कि उन्होंने 18 मार्च से अगस्त के अंत तक प्रदर्शनों से जुड़ी 29 फाँसियों का दस्तावेजीकरण किया था। उनके अनुसार इनमें से 16 मामलों में किसी की हत्या करने का आरोप नहीं था। 12 लोगों के साक्षात्कार तथा आधिकारिक घोषणाओं, अदालती सामग्री और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा पर आधारित जाँच में जल्दबाज़ी में हुई कार्यवाहियों और यातना से प्रभावित स्वीकारोक्तियों का वर्णन किया गया। ये निष्कर्ष रिपोर्ट में जाँचे गए पुराने मामलों से संबंधित थे, न कि 8 नवंबर को घोषित तीन फाँसियों से।

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