प्रधानमंत्री आवास की पूर्व कर्मचारी के खिलाफ सारा नेतन्याहू का मुकदमा अदालत ने खारिज किया
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एक अदालत ने रविवार, 1 नवंबर को प्रधानमंत्री आवास की पूर्व कर्मचारी सिल्वी गान्सिया के खिलाफ सारा नेतन्याहू का मानहानि और निजता संबंधी मुकदमा खारिज कर दिया और नेतन्याहू को कानूनी खर्च के रूप में 10,000 शेकेल चुकाने का आदेश दिया। नेतन्याहू ने आवास में नौकरी के दौरान अपने साथ हुए व्यवहार के बारे में गान्सिया के सार्वजनिक बयानों को लेकर 2020 में यह दीवानी मुकदमा दायर किया था। विवाद दिसंबर 2019 और मई 2020 में प्रकाशित दो बयानों से संबंधित था। अदालत ने सत्यता और सद्भावना पर आधारित बचाव स्वीकार किया तथा निजता संबंधी दावा खारिज कर दिया। उसने पाया कि गान्सिया ने सबूत पेश करने का अपना दायित्व पूरा किया था और कहा कि प्रकाशित बयानों में उनके आरोप सत्य साबित हुए थे। अदालत के तर्क में प्रत्येक साक्ष्य को अलग-अलग परखने के बजाय सभी साक्ष्यों को एक साथ देखने पर जोर दिया गया। नेतन्याहू ने गान्सिया के विवरण का खंडन किया था और आरोप लगाया था कि राजनीतिक हितों से जुड़े लोगों ने प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने के लिए पूर्व कर्मचारी को धन दिया और उसका इस्तेमाल किया। गान्सिया के मौजूदा वकील शाउल इदा ने कहा कि मुकदमेबाजी छह साल से अधिक चली और इसे अपनी मुवक्किल को चुप कराने का प्रयास बताया। इदा ने बिना शुल्क लिए गान्सिया की पैरवी की। गान्सिया के पूर्व वकील द्वारा अंतिम दलीलें पेश न करने के बाद उनके खिलाफ दिए गए दो पुराने फैसले रद्द किए जा चुके थे; इसके बाद अब मुकदमा खारिज हुआ है। एक पुराने फैसले के तहत उन्हें 100,000 शेकेल चुकाने पड़ते। इस तरह नया फैसला उन पुराने प्रक्रियागत नतीजों से अलग है: नेतन्याहू के दावे खारिज कर दिए गए हैं और पूर्व कर्मचारी के पक्ष में कानूनी खर्च देने का आदेश हुआ है।
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