रब्बी मोशे माया ने कहा, आइज़नकोट के साथ गठबंधन वार्ता की संभावना खारिज नहीं की जानी चाहिए
शास की तोराह विद्वान परिषद के सदस्य रब्बी मोशे माया ने कहा है कि गादी आइज़नकोट के साथ गठबंधन वार्ता की संभावना खारिज नहीं की जानी चाहिए। 1 नवंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में हाल के दिनों में उनकी कही बातों का हवाला देते हुए यह रुख सामने आया। आइज़नकोट याशार के नेता हैं। माया ने कहा: “आइज़नकोट के साथ गठबंधन वार्ता को खारिज करने का कोई कारण नहीं है।” रिपोर्ट में दी गई उनकी टिप्पणी इस सवाल से संबंधित है कि वार्ता पर विचार किया जाए या नहीं। इसमें न तो वार्ता शुरू होने की घोषणा है, न वार्ता की शर्तें तय की गई हैं और न किसी गठबंधन समझौते का वर्णन है। रिपोर्ट ने इस टिप्पणी को तोराह विद्वान परिषद के औपचारिक निर्णय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया है। यह बात शास के संस्थापकों में से एक रब्बी निसिम ज़ेएव की पार्टी नेतृत्व और चुनाव अभियान संबंधी टिप्पणियों के साथ सामने आई। 15:00 बजे के समाचार बुलेटिन में एक साक्षात्कार के दौरान ज़ेएव ने अनुमान जताया कि आर्येह देरी नेता बने रहेंगे। उन्होंने देरी को शास की पहचान से गहराई से जुड़ा बताया और तर्क दिया कि देरी का विरोध पार्टी का विरोध है। ज़ेएव ने मतदाताओं को लामबंद करने की अभियान की क्षमता की भी आलोचना की। उनके आकलन में अधिक कड़ाई से धार्मिक पालन करने वाले हरेदी मतदाता अगुदात यिसराएल की ओर चले गए थे, जबकि दक्षिणपंथी मतदाता इतामार बेन-गवीर और संभवतः लिकुड की ओर गए थे। ये पार्टी की स्थिति के बारे में ज़ेएव के आकलन थे, न कि नेतृत्व के किसी निर्णय की घोषणा या मतदाताओं के रुझान में बदलाव का मापा हुआ विवरण।
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