खबरों के अनुसार माइकल राबिलो ने राज्य नियंत्रक की दौड़ से हटने का फैसला किया
खबरों के अनुसार, अधिवक्ता माइकल राबिलो ने नई नेसेट के कार्यभार संभालने के बाद राज्य नियंत्रक पद के लिए फिर से चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। निवर्तमान गठबंधन का संसदीय बहुमत समाप्त होने की पृष्ठभूमि में 4 नवंबर को इस निर्णय की खबर सामने आई। पहले बेंजामिन नेतन्याहू के निजी वकील रह चुके राबिलो ने इस खबर पर प्रतिक्रिया नहीं दी। उच्च न्यायालय द्वारा पहले हुए दूसरे दौर के मतदान को अमान्य ठहराए जाने के बाद राबिलो ने निवर्तमान नेसेट में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी। उनके सहयोगियों ने इस धारणा को खारिज किया कि नेतन्याहू और लिकुड के लिए किया गया उनका काम उन्हें इस निगरानी पद के लिए अनुपयुक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि राबिलो हितों के टकराव संबंधी पाबंदियों का पालन करेंगे और नेतन्याहू के निजी मामलों से असंबंधित विषयों की जांच कर सकेंगे। चुनाव का प्रारूप अब भी तय नहीं हुआ है। एक संभावना केवल अमान्य घोषित दूसरे दौर का मतदान दोहराने की है; दूसरी संभावना नए नामांकन खोलने की है। यदि राबिलो हट जाते हैं और नए नामांकन की अनुमति नहीं मिलती, तो उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश योसेफ़ एलरॉन अकेले शेष उम्मीदवार होंगे। नेसेट की कानूनी सलाहकार सागित अफ़िक ने प्रारंभिक तौर पर दूसरे दौर का मतदान दोहराने को प्राथमिकता दी है। हालांकि उन्होंने परस्पर विरोधी पहलुओं को स्वीकार करते हुए निर्णय नई नेसेट और उसके अध्यक्ष के पद संभालने तक के लिए छोड़ दिया है। मूल पहले दौर में एलरॉन को 60 और राबिलो को 57 वोट मिले थे, जो आवश्यक 61 वोटों से कम थे। राबिलो दूसरे दौर में जीते, लेकिन गठबंधन के सांसदों द्वारा मतदान की गोपनीयता का उल्लंघन करते हुए अपने वोटों को दर्ज किए जाने के बाद उस दौर को अमान्य कर दिया गया। 26वीं नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होना है।
स्रोत
रिपोर्टिंग में अंतर
योसेफ़ एलरॉन के अकेले शेष उम्मीदवार होने के सवाल पर स्रोतों में तथ्यात्मक मतभेद है: किपा उन्हें एकमात्र उम्मीदवार बताता है; वाईनेट के अनुसार यह नए नामांकन की अनुमति न मिलने पर निर्भर है। दोनों माइकल राबिलो के फिर से चुनाव न लड़ने के निर्णय की खबर देते हैं।


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