सैन्य सेंसर ने 7 अक्टूबर से पहले मिले दो खुफ़िया संकेतों का विवरण प्रकाशित करने की अनुमति दी
सैन्य सेंसर ने इज़राइल पर हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले की रात मिले दो और खुफ़िया संकेतों को प्रकाशित करने की अनुमति दी है। 4 नवंबर को सामने आए नए विवरण हमले से पहले हमास के वरिष्ठ कमांडरों की आवाजाही और इस आतंकवादी संगठन की टैंक-रोधी इकाइयों की तैयारियों से संबंधित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक संकेत में हमास की सैन्य शाखा के प्रमुख मुहम्मद देइफ़ को संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ग़ज़ा के भूमिगत सुरंग तंत्र में जाते हुए पहचाना गया था। दूसरा संकेत हमास की टैंक-रोधी इकाइयों की परिचालन गतिविधियों में असामान्य बदलावों और उनकी तैयारियों के एक विशिष्ट ढर्रे से संबंधित था। सैन्य सेंसर ने पहले इन दोनों संकेतों का प्रकाशन रोक रखा था। ये उस जानकारी में जुड़ते हैं जिसकी हमले से पहले की खुफ़िया नाकामियों के संदर्भ में जाँच हुई है, जिसमें विशेष सिम कार्ड सक्रिय किया जाना और निगरानी चौकियों से दी गई चेतावनियाँ भी शामिल हैं। यह खुलासा पूर्व आईडीएफ प्रमुख हेर्ज़ी हलेवी के न्यूयॉर्क में 1 नवंबर को आयोजित शूरात हादीन के सम्मेलन में दिए गए बयान के बाद हुआ है। हलेवी ने कहा, “7 अक्टूबर एक ऐसी विफलता थी जिसे रोका जा सकता था।” उन्होंने इन नाकामियों की जाँच के लिए एक राजकीय जाँच आयोग बनाने की वकालत की। अपने संबोधन में हलेवी ने युद्ध से पहले आईडीएफ, शिन बेट और राजनीतिक नेतृत्व के बीच साझा आकलन का उल्लेख किया कि हमास युद्ध में जाने के बजाय ग़ज़ा में अपना शासन मज़बूत करना चाहता था। उन्होंने कहा कि हमास ने जानबूझकर इस ग़लत आकलन को बढ़ावा दिया। हलेवी ने यह भी कहा कि हमले से पहले इज़राइल की ख़तरे संबंधी प्राथमिकताओं में ईरान पहले, हिज़्बुल्लाह दूसरे और हमास तीसरे स्थान पर था।

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