नेतन्याहू मुकदमे में मंडेलब्लिट की गवाही सीमित करने के प्रयास पर न्यायाधीश ने सवाल उठाए
प्रकाशित
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुकदमे में पूर्व अटॉर्नी जनरल अविहाई मंडेलब्लिट से पूछताछ का दायरा बढ़ाने के खिलाफ अभियोजकों की आपत्ति अदालत ने 28 अक्टूबर को बहुमत से स्वीकार कर ली, हालांकि न्यायाधीश मोशे बार-अम ने इसका विरोध किया। विवाद इस बात पर था कि क्या बचाव पक्ष मंडेलब्लिट की मंजूरियों के बाद की गई जांच संबंधी कार्रवाइयों के बारे में सवाल पूछ सकता है। पहले की पूछताछ में उन मंजूरियों से पहले की कार्रवाइयों और मंजूरी देने की प्रक्रिया पर सवाल हो चुके थे। अभियोजक येहुदित तिरोश ने तर्क दिया कि पूछताछ को अटॉर्नी जनरल की मंजूरियों का आकलन करने के लिए जरूरी विषयों तक सीमित रहना चाहिए और अभियोजन की आंतरिक प्रक्रियाओं को व्यापक रूप से जांच के दायरे में नहीं लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीमों ने जांच सामग्री की समीक्षा की थी। जांच की फाइल में गायब सामग्री के बारे में सवाल जांचकर्ताओं से पूछे जाने चाहिए, न कि इस अनुपस्थिति को मंडेलब्लिट को गुमराह किए जाने का प्रमाण माना जाना चाहिए। न्यायाधीश रिव्का फ्रीडमैन-फेल्डमैन ने जवाब दिया कि मंडेलब्लिट ने कहा था कि उन्होंने प्रतिलिपियों सहित कुछ सामग्री नहीं देखी थी। न्यायाधीश मोशे बार-अम ने कहा कि गवाही में उठे मुद्दे बचाव पक्ष की कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग संबंधी दलील के लिए प्रासंगिक लगते हैं और उनकी पड़ताल न करने से तथ्यात्मक रिकॉर्ड अधूरा रह सकता है। बार-अम ने पूछा: “हम इस बात को कैसे अनदेखा कर सकते हैं कि एक पूर्व अटॉर्नी जनरल गैरकानूनी कार्रवाइयों के बारे में गवाही दे रहा है?” उनका सवाल अदालत के समक्ष दी गई गवाही से संबंधित था; इससे यह न्यायिक निष्कर्ष स्थापित नहीं हुआ कि कोई विशेष जांच कार्रवाई गैरकानूनी थी। अंततः बहुमत ने उस विषय पर पूछताछ रोक दी और बार-अम अल्पमत में रहे। फैसले के बाद नेतन्याहू के बचाव पक्ष के वकील ने सुनवाई समाप्त करने का अनुरोध किया, ताकि बचाव पक्ष नए सिरे से तैयारी कर सके। यह बहस मंडेलब्लिट की पहले दी गई उस गवाही के बाद हुई, जिसमें उन्होंने बताया था कि निगरानी की भूमिका बनाए रखते हुए वे जांच के विषयों को मंजूरी देते थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद थी कि महत्वपूर्ण जांच कार्रवाइयां उनके सामने लाई जाएंगी, जबकि जांचकर्ताओं के पास विवेकाधिकार बना रहेगा। बार-अम ने सवाल उठाया था कि क्या अधिक विशिष्ट मंजूरियों से सीमाएं ज्यादा स्पष्ट हो जातीं। बुधवार का विवाद इस बात पर था कि बचाव पक्ष उन मंजूरियों पर अमल की कितनी गहराई से जांच कर सकता है।
स्रोत
रिपोर्टिंग में अंतर
आपत्ति के नतीजे पर स्रोतों में तथ्यात्मक मतभेद है: किकार हाशब्बात की रिपोर्ट के अनुसार बार-अम ने अभियोजन की आपत्ति खारिज कर दी; यनेट की अद्यतन रिपोर्ट कहती है कि अदालत के बहुमत ने आपत्ति स्वीकार की और बार-अम अल्पमत में रहे। दोनों रिपोर्टों में अभियोजकों के पूछताछ सीमित करने के प्रयास और उस पर बार-अम के सवालों का उल्लेख है।
इस खबर से जुड़े लोग


टिप्पणियाँ
टिप्पणियां लोड हो रही हैं…