ईरान के रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर विचार करने को लेकर इज़राइल ने अमेरिका को कथित तौर पर चेतावनी दी
3 नवंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में उद्धृत अमेरिकी और क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, इज़राइल ने अमेरिका के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की जिससे संकेत मिलता था कि ईरान अपने विरोधियों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा था। यह विवरण एक खुफिया आकलन का है, न कि रासायनिक हमला करने के किसी पुष्ट ईरानी फैसले का। कथित तौर पर इज़राइली अधिकारियों ने इससे पहले के दो सप्ताह के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ इस खतरे पर चर्चा की और इसे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं से अधिक तात्कालिक बताया। कुछ अमेरिकी अधिकारी इस जानकारी से चिंतित थे, जबकि अन्य ने गंभीर संदेह व्यक्त किया। कुछ ने इस चेतावनी को प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा माना जिनका उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को ईरान के खिलाफ व्यापक लड़ाई फिर शुरू करने के लिए राज़ी करना था। इज़राइल ने कथित तौर पर खाड़ी देशों के अधिकारियों के साथ भी कुछ खुफिया जानकारी साझा की। खाड़ी क्षेत्र के कुछ अधिकारियों ने सवाल उठाया कि क्या ईरान की वास्तव में रासायनिक हथियार इस्तेमाल करने की कोई योजना थी और संदेह जताया कि इस चेतावनी का उद्देश्य फिर से तीव्र लड़ाई को प्रोत्साहित करना था। खुफिया जानकारी साझा किए जाने की रिपोर्ट से यह स्थापित नहीं होता कि उन सरकारों ने इज़राइल के आकलन को स्वीकार कर लिया। 31 मार्च के हमले के बारे में पहले की एक घोषणा में इज़राइल रक्षा बल ने कहा था कि उसने तोफ़ीक दारू की एक अनुसंधान और विकास फैक्टरी को निशाना बनाया था, जो एसपीएनडी को फ़ेंटेनिल की आपूर्ति करती थी। सेना ने एसपीएनडी को ईरान में रासायनिक हथियारों के विकास के लिए ज़िम्मेदार बताया और कहा कि यह सामग्री उस अनुसंधान में काम आती थी। सेना का वह पिछला बयान न तो हाल में रिपोर्ट की गई खुफिया चेतावनी की पुष्टि करता है, न ऐसे हथियार इस्तेमाल करने के किसी ईरानी फैसले की।


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